- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- पाकिस्तान से दुबई के...
पाकिस्तान से दुबई के रास्ते भारत में तस्करी का बड़ा खुलासा, 25 हजार किलो तरबूज के बीज जब्त

मुंबई। भारत में पाकिस्तानी वस्तुओं के आयात पर लगी रोक को दरकिनार करने की एक और बड़ी कोशिश का राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पर्दाफाश किया है। डीआरआई ने 'ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट' के तहत कार्रवाई करते हुए मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर करीब 25 हजार किलोग्राम तरबूज के बीजों की खेप पकड़ी है। जांच में पता चला कि ये बीज पाकिस्तान से दुबई के रास्ते भारत लाए गए थे। आयात प्रतिबंध से बचने के लिए इन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का उत्पाद बताकर आयात किया जा रहा था। जब्त माल की अनुमानित बाजार कीमत करीब 2.02 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में डीआरआई ने 22 अक्टूबर 2026 को दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
वित्त मंत्रालय की ओर से शुक्रवार, 23 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई 11 सितंबर से 22 अक्टूबर 2026 के बीच चलाए गए अभियान का हिस्सा है। जांच में पाकिस्तान से भारत तक सामान पहुंचाने के लिए अपनाए गए मार्ग, कंटेनरों की अदला-बदली और कथित रूप से तैयार किए गए फर्जी दस्तावेजों का खुलासा हुआ है।
खुफिया जानकारी के आधार पर न्हावा शेवा बंदरगाह पर कार्रवाई
डीआरआई अधिकारियों को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान में तैयार माल को तीसरे देश के रास्ते भारत लाकर आयात प्रतिबंध का उल्लंघन किया जा रहा है।
इसी सूचना के आधार पर अधिकारियों ने न्हावा शेवा बंदरगाह के जरिए आयात की गई लगभग 25 हजार किलोग्राम बीजों की खेप की जांच की।
आयात संबंधी दस्तावेजों में इन बीजों को यूएई में उत्पादित खरबूजे के बीज बताया गया था। हालांकि, भौतिक जांच के दौरान पता चला कि खेप में खरबूजे के बजाय तरबूज के बीज मौजूद थे।
इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित व्यापारिक दस्तावेजों और माल की आवाजाही का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। जांच में ऐसे साक्ष्य सामने आए जिनसे बीजों के पाकिस्तानी मूल के होने की पुष्टि हुई।
कराची से दुबई और फिर भारत पहुंचाई गई खेप
डीआरआई की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तरबूज के बीजों को सबसे पहले पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से रवाना किया गया था।
वहां से माल एक जहाज के जरिए दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पहुंचा। दुबई में खेप को दूसरे कंटेनरों में स्थानांतरित किया गया और इसके बाद एक अलग जहाज में लादकर भारत भेज दिया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, जहाज और कंटेनर बदलने का उद्देश्य माल के वास्तविक मूल देश की पहचान छिपाना था।
भारत पहुंचने पर आयात दस्तावेजों में सामान का मूल देश यूएई बताया गया। हालांकि, डीआरआई को मिले दस्तावेजी साक्ष्यों ने कराची से दुबई और फिर भारत तक माल की आवाजाही को स्थापित किया।
अधिकारियों के मुताबिक, यह व्यवस्था पाकिस्तान से आने वाले प्रतिबंधित माल को दूसरे देश का उत्पाद दिखाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
2.02 करोड़ रुपये के बीज किए गए जब्त
डीआरआई ने जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर 14 अक्टूबर 2026 को लगभग 25 हजार किलोग्राम तरबूज के बीजों की खेप जब्त कर ली।
इस माल की अनुमानित बाजार कीमत 2.02 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, आयात में दो अलग-अलग नियमों का उल्लंघन पाया गया।
पहला, भारत सरकार ने दो मई 2025 से पाकिस्तान में उत्पादित या वहां से निर्यात किए गए सामान के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात तथा पारगमन पर प्रतिबंध लगा रखा है।
दूसरा, भारत में तरबूज के बीजों का आयात एक जुलाई 2024 से प्रतिबंधित श्रेणी के बजाय नियंत्रित यानी रिस्ट्रिक्टेड श्रेणी में रखा गया है।
इन्हीं प्रावधानों के उल्लंघन के आधार पर सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत कार्रवाई की गई।
आयातक के बेटे और भतीजे को किया गिरफ्तार
जांच के दौरान डीआरआई को इस कारोबार से जुड़े दो व्यक्तियों की भूमिका का पता चला।
अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आरोपी आयात-निर्यात कोड धारक के परिवार से संबंधित हैं। इनमें एक उसका बेटा और दूसरा भतीजा है।
आयातक का बेटा दुबई स्थित आपूर्तिकर्ता कंपनी का मालिक और निदेशक बताया गया है।
वहीं, उसका भतीजा भारत में आयात संबंधी औपचारिकताओं और घरेलू बाजार में माल की बिक्री का काम संभालता था।
डीआरआई ने दोनों आरोपियों को 22 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। एजेंसी अब इस कारोबार से संबंधित अन्य दस्तावेजों और लेनदेन की जांच कर रही है।
हालांकि, गिरफ्तार व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
फरवरी में भी मंगाई गई थी 22 हजार किलो बीजों की खेप
इस मामले की जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।
डीआरआई के अनुसार, संबंधित आयातक ने फरवरी 2026 में उसी दुबई स्थित आपूर्तिकर्ता कंपनी से करीब 22 हजार किलोग्राम खरबूजे के बीज आयात किए थे।
उस समय भी दस्तावेजों में माल का मूल देश यूएई बताया गया था।
हालांकि, जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि उस खेप को भी दूसरे देश के रास्ते स्थानांतरित करके भारत पहुंचाया गया था।
इससे फरवरी में आयात किए गए माल के वास्तविक मूल देश को लेकर गंभीर संदेह पैदा हुआ है।
डीआरआई की जांच में इस मामले से संबंधित कुल 46,920 किलोग्राम पाकिस्तानी मूल के तरबूज और खरबूजे के बीजों का पता चला है। यह आंकड़ा हाल में जब्त की गई लगभग 25 हजार किलोग्राम की खेप से अलग, जांच में सामने आए कुल माल को दर्शाता है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने लगाया था प्रतिबंध
भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने दो मई 2025 को अधिसूचना जारी करके पाकिस्तान में उत्पादित या वहां से निर्यात होने वाली सभी वस्तुओं के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आयात पर रोक लगा दी थी।
इस प्रतिबंध में तीसरे देश के रास्ते भारत आने वाली पाकिस्तानी वस्तुएं भी शामिल हैं।
सरकार ने यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक नीति से जुड़े कारणों के आधार पर उठाया था।
डीआरआई अब उन कारोबारियों और नेटवर्क पर विशेष नजर रख रही है, जिन पर किसी अन्य देश के नाम से पाकिस्तानी उत्पाद भारत पहुंचाने का संदेह है।
पहले भी पकड़ी गई थीं खजूर और सेंधा नमक की खेप
ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट के तहत डीआरआई इससे पहले भी कई बड़ी कार्रवाइयां कर चुकी है।
सितंबर 2026 में एजेंसी ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित अंबड कंटेनर फ्रेट स्टेशन पर पाकिस्तानी मूल के 362 मीट्रिक टन से अधिक सूखे खजूर जब्त किए थे।
इन खजूरों को 13 कंटेनरों में दुबई के जेबेल अली बंदरगाह के रास्ते भारत भेजा गया था। दस्तावेजों में माल का मूल देश यूएई बताया गया था।
इसके बाद अक्टूबर में डीआरआई ने 295 कंटेनरों में लाए गए लगभग 7,311 मीट्रिक टन पाकिस्तानी मूल के औद्योगिक और हिमालयी सेंधा नमक के अवैध आयात का भी खुलासा किया।
इस माल को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह के रास्ते भारत लाया गया था। जांच में कथित फर्जी मूल प्रमाणपत्र और बिल इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर डीआरआई की नजर
राजस्व खुफिया निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित वस्तुओं को गलत जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर भारत लाने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
एजेंसी का उद्देश्य सीमा शुल्क संबंधी धोखाधड़ी रोकना और भारत की व्यापार नीति से जुड़े प्रतिबंधों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना है।
फिलहाल तरबूज के बीजों की खेप से जुड़े दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि इस कारोबार में अन्य किन व्यक्तियों और कंपनियों की भूमिका रही है।
डीआरआई के मुताबिक, जांच में मिले दस्तावेजों से पाकिस्तान से दुबई और फिर भारत तक माल की आवाजाही स्थापित हुई है। अब अन्य संदिग्ध आयात और संबंधित व्यापारिक लेनदेन की भी पड़ताल की जा सकती है।





